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| रायपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत करते बाबा रामदेव। |
बाबा रामदेव ने कहा कि देश में हिंदू, मुसलमान, क्षत्रिय या ब्राह्मण खतरे में नहीं हैं, बल्कि भारतीय बचपन, देश की जवानी, वर्तमान और भविष्य खतरे में है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग अपने आंदोलनों के लिए देश के बचपन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए आंदोलन होना चाहिए, लेकिन आंदोलन के नाम पर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए। उनके बयान में देश की युवा पीढ़ी और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता प्रमुख रूप से सामने आई।
राष्ट्रगीत से जुड़े विवाद पर भी बाबा रामदेव से सवाल किया गया। कांग्रेस नेतृत्व पर राष्ट्रगीत के अपमान के आरोपों और इसे लेकर जारी राजनीतिक बहस के बारे में उन्होंने कहा कि घटनाओं से जुड़े हुए वीडियो अभी तक देखा है।
बाबा रामदेव ने कहा कि वंदे मातरम, देश की एकता और अखंडता जैसे विषयों पर पूरे देश को एक होना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रहित और राष्ट्रधर्म को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि ऐसे मुद्दों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज और देश की मौजूदा स्थिति पर भी उन्होंने संतुलित दृष्टिकोण रखने की बात कही। बाबा रामदेव ने कहा, “केवल एक प्रधानमंत्री पूरा देश ठीक कर देंगे, यह अपेक्षा रखना भी उचित नहीं है।”
उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की नीतियों से देश में बहुत कुछ अच्छा हुआ है। साथ ही, उनका कहना था कि जो लोग यह कहते हैं कि देश में कुछ भी अच्छा नहीं हुआ, वे गलत हैं और जो यह दावा करते हैं कि सब कुछ सही हो चुका है, वे भी गलत हैं।
बाबा रामदेव ने स्थिति को न्यायपूर्ण और निष्पक्ष नजरिए से देखने पर जोर दिया। उनके मुताबिक देश की व्यवस्था को लेकर किसी एक छोर पर जाने के बजाय संतुलित सोच रखना जरूरी है।
शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के सवाल पर बाबा रामदेव ने सरकारी सेवाओं में सुधार के लिए एक सुझाव भी दिया। उन्होंने सरकारी शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कहा कि सरकारी तंत्र की नौकरी या सुविधाओं का लाभ उठाने वाले सभी लोगों के बच्चों के लिए सरकारी स्कूलों में पढ़ना और सरकारी अस्पतालों में इलाज कराना अनिवार्य किया जाना चाहिए।
बाबा रामदेव ने कहा कि देश के सामने सिर्फ नौकरियों की समस्या नहीं है। पर्यावरण जैसे दूसरे गंभीर मुद्दे भी मौजूद हैं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने व्यवस्था में सुधार के लिए केवल सरकार पर निर्भर रहने के बजाय समाज के हर व्यक्ति से मिलकर पुरुषार्थ करने की आवश्यकता बताई। इस दौरान उनके बयान में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और देश की युवा पीढ़ी से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे।
