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| रेंजर की नौकरी के नाम पर 8 लाख रुपए की ठगी के मामले में पुलिस की कार्रवाई। |
आरोपियों ने भरोसा कायम करने के लिए मंत्रालय से जारी होने की बात कहकर एक नियुक्ति प्रमाण पत्र भी दिया था। जांच के दौरान पुलिस ने इस दस्तावेज को फर्जी पाया। पुलिस ने फर्जी नियुक्ति पत्र के साथ मामले से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामान जब्त कर जांच में शामिल किए हैं।
रेंजर की नौकरी नहीं लगी तो पैसे वापस मांगे
पुलिस के अनुसार, यह मामला साल 2023 से जुड़ा है। आरोपियों ने उस समय दिनेश कुमार के बेटे को वन विभाग में रेंजर की नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। उनकी बातों पर विश्वास करके दिनेश ने आरोपियों को कुल 8 लाख रुपए दे दिए।
इसके बाद भी जब बेटे की नौकरी नहीं लगी तो दिनेश ने आरोपियों से अपनी रकम वापस मांगी। आरोप है कि आरोपी पैसे लौटाने के नाम पर लगातार टालमटोल करते रहे और हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर रकम वापस करने से बचते रहे।
काफी समय बीतने के बाद भी जब पैसे नहीं लौटाए गए तो दिनेश को ठगी का शक हुआ। इसके बाद उन्होंने भिलाई भट्ठी थाने में शिकायत दर्ज कराई।
9 अगस्त 2026 को दर्ज हुई शिकायत
पुलिस के मुताबिक, सेक्टर-2 भिलाई के रहने वाले दिनेश कुमार ने 9 अगस्त 2026 को थाने में शिकायत दी थी। शिकायत में उन्होंने बताया कि साल 2023 में आरोपियों ने उनके बेटे को वन विभाग में रेंजर की नौकरी दिलाने की बात कही थी और इसी भरोसे पर उनसे 8 लाख रुपए लिए गए।
इस दौरान आरोपियों ने मंत्रालय से जारी नियुक्ति प्रमाण पत्र बताकर एक दस्तावेज भी दिया था। पुलिस जांच में यह दस्तावेज फर्जी निकला। इसके बाद पुलिस ने मामले में आरोपियों की भूमिका और रकम के लेनदेन से जुड़े पहलुओं की जांच शुरू की।
तीनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया
पुलिस ने मामले की जांच के बाद भारतेन्दु मेश्राम (36), निवासी एकता नगर, ठेलका बोर्ड, कांकेर, हनी श्रेष्ठ (42), निवासी कृष्णा ग्रैण्ड सिटी, आर्य नगर, कोहका, स्मृति नगर चौकी, थाना सुपेला, दुर्ग और भोजेन्द्र कुमार (32), निवासी ग्राम टिकरी अर्जुन्दा, थाना अर्जुन्दा, जिला बालोद को गिरफ्तार किया।
पुलिस टीम ने आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश देकर उन्हें हिरासत में लिया। पूछताछ और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर 11 अगस्त को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
फर्जी नियुक्ति पत्र और दस्तावेज जब्त
पुलिस ने आरोपियों के पास से फर्जी नियुक्ति पत्र के अलावा मामले से संबंधित दस्तावेज और अन्य सामान जब्त किया है। जांच में यह भी सामने आया कि नौकरी नहीं लगने के बाद प्रार्थी ने कई बार अपनी रकम वापस मांगी थी, लेकिन आरोपियों की ओर से लगातार टालमटोल की जाती रही।
पुलिस अब 8 लाख रुपए की रकम के लेनदेन और मामले में आरोपियों की भूमिका से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
कोर्ट ने तीनों आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजा
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट से उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।
