![]() |
| एनएच-53 पर सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए ट्रैफिक सिस्टम में बदलाव की तैयारी। |
योजना पूरी होने के बाद दोपहिया वाहनों को मेन लेन में चलने की अनुमति नहीं होगी। उन्हें केवल सर्विस लेन से ही गुजरना होगा। नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पूरे मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे, ताकि उल्लंघन करने वालों पर नजर रखी जा सके।
टाटीबंध चौक से नेहरू नगर चौक तक की दूरी लगभग 26 किलोमीटर है। फ्लाईओवर वाले हिस्से को छोड़कर दोनों ओर करीब 18-18 किलोमीटर क्षेत्र में क्रैश बैरियर लगाए जाएंगे। खुर्सीपार चौक, भिलाई-3 और चरोदा समेत जिन स्थानों पर मिडिल कट मौजूद हैं, वहां वाहनों की आवाजाही के लिए आवश्यक जगह छोड़ी जाएगी। इस परियोजना के लिए एजेंसी चयन की निविदा अंतिम चरण में है और अगले दो से तीन महीने के भीतर काम शुरू होने की संभावना जताई गई है।
सर्विस लेन को चौड़ा करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है। हाईवे के किनारे पर्याप्त जगह उपलब्ध है, लेकिन कई स्थानों पर अतिक्रमण के कारण सर्विस लेन संकरी हो गई है। चौड़ीकरण का काम शुरू होने से पहले इन अतिक्रमणों को हटाया जाएगा।
एनएच-53 मुंबई, कोलकाता और दक्षिण भारत को जोड़ने वाला एक प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग है। इस मार्ग से प्रतिदिन करीब 54 हजार वाहन गुजरते हैं। हर वर्ष यहां ट्रैफिक में लगभग 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। कुल वाहनों में लगभग 20 प्रतिशत यानी करीब 11 हजार दोपहिया वाहन शामिल हैं। भारी वाहनों के साथ मेन लेन में दोपहिया वाहनों के चलने से दुर्घटना का खतरा अधिक रहता है। विभाग का मानना है कि दोपहिया वाहनों को सर्विस लेन में स्थानांतरित करने से हादसों में कमी आएगी।
स्टील या कंक्रीट से तैयार किए जाने वाले क्रैश बैरियर टक्कर की स्थिति में मुड़कर वाहन की गति और झटके को कम करने का काम करते हैं। इससे वाहन के पलटने या दूर तक उछलने की आशंका घट जाती है। इसके अलावा बैरियर लगाने से मवेशियों के मेन लेन में प्रवेश को रोकने में भी मदद मिलेगी।
पीडब्ल्यूडी (एनएच) के एसडीओ आरएस गंजीर ने बताया कि दोनों ओर 18-18 किलोमीटर क्षेत्र में क्रैश बैरियर लगाए जाएंगे। वहीं सर्विस लेन को दोगुना चौड़ा करने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।
![]() |
| एनएच-53 पर सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए ट्रैफिक सिस्टम में बदलाव की तैयारी। |

