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| दुर्ग में H1N1 संक्रमण की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क। |
दुर्ग के सिविल सर्जन डॉ. आशीष कुमार मिंज ने बताया कि बच्ची को तेज बुखार और फ्लू जैसे लक्षण होने पर अस्पताल लाया गया था। फिलहाल उसका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में चल रहा है और उसकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है।
रिपोर्ट सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम बच्ची के घर पहुंची। टीम आसपास के इलाके में भी निगरानी कर रही है और घर-घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी जुटा रही है।
बच्ची के परिवार के अन्य सदस्यों के सैंपल भी लिए गए हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग उन लोगों की जानकारी जुटा रहा है, जो बच्ची के संपर्क में आए थे। इसका उद्देश्य संभावित संक्रमण का शुरुआती स्तर पर पता लगाना है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से फिलहाल स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। संपर्क में आए लोगों की निगरानी और सैंपलिंग के जरिए संक्रमण से जुड़ी स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है।
दुर्ग में स्वाइन फ्लू: 5 साल से कम उम्र के बच्चों में खतरा
संक्रमित बच्ची की उम्र 5 साल से कम है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इस उम्र के बच्चे फ्लू से गंभीर बीमारी के अधिक जोखिम वाले समूह में आते हैं।
स्वाइन फ्लू का संक्रमण खांसने, छींकने और बात करने के दौरान निकलने वाली छोटी बूंदों या कणों के जरिए एक व्यक्ति से दूसरे तक फैल सकता है। बंद और भीड़भाड़ वाली जगहों पर संक्रमण फैलने का खतरा अधिक रहता है।
स्वाइन फ्लू के इन लक्षणों पर रखें नजर
स्वाइन फ्लू में अचानक तेज बुखार के साथ खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, सिरदर्द, कमजोरी और नाक बहने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों को सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।
ऐसे लक्षणों को लंबे समय तक सामान्य बुखार या मौसम में बदलाव का असर मानकर घर पर इलाज नहीं करना चाहिए। खासकर छोटे बच्चों में तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, लगातार बुखार या हालत बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
