छत्तीसगढ़ में प्रतिबंध के बावजूद ट्रेन से पहुंचा 500 किलो संदिग्ध एनालॉग पनीर, रायपुर स्टेशन पर जब्त

रायपुर रेलवे स्टेशन पर खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा अमरकंटक एक्सप्रेस से पहुंचे 500 किलो संदिग्ध एनालॉग पनीर की खेप जब्त करते अधिकारी
रायपुर रेलवे स्टेशन पर जांच के दौरान जब्त की गई संदिग्ध एनालॉग पनीर की खेप।
छत्तीसगढ़ में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लागू होने के बाद भी इसकी सप्लाई रुकती नजर नहीं आ रही है। अब इस काम के लिए ट्रेन मार्ग का इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है। बुधवार को रायपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 1 खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए करीब 500 किलो संदिग्ध पनीर की खेप जब्त कर ली। विभाग को खेप के स्टेशन पहुंचने की पूर्व सूचना पहले ही मिल चुकी थी।

जानकारी के अनुसार यह पनीर अमरकंटक एक्सप्रेस से भोपाल से रायपुर लाया गया था। कार्रवाई के दौरान रेलवे और खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के बीच जिम्मेदारी तय करने को लेकर करीब चार घंटे तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। बाद में खाद्य सुरक्षा विभाग ने पनीर के नमूने लेकर जांच के लिए सुरक्षित रखवा दिए। अधिकारियों का कहना है कि लैब रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बुधवार सुबह अमरकंटक एक्सप्रेस से 10 बड़े डिब्बे उतारे गए। विभाग को पहले से इन डिब्बों में करीब 500 किलो संदिग्ध एनालॉग पनीर होने की खुफिया सूचना प्राप्त हो चुकी थी। जानकारी मिलने पर खाद्य सुरक्षा विभाग और रेलवे के अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरी खेप को जब्त कर लिया।

मौके पर अधिकारियों ने पनीर के सैंपल लेकर उन्हें प्रयोगशाला भेज दिया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि यह पनीर खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा उतरता है या नहीं। यदि जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यापारी और सप्लाई चेन से जुड़े लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि यह पनीर शहर के होटल, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तक पहुंचाने के लिए मंगाया गया था। अब विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि इतनी बड़ी खेप किस व्यापारी ने मंगाई थी और इसे किन-किन स्थानों पर भेजा जाना था। साथ ही पूरी सप्लाई चेन की जानकारी भी जुटाई जा रही है ताकि प्रतिबंधित उत्पाद के नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

सूत्रों के अनुसार भोपाल से हर सप्ताह बड़ी मात्रा में पनीर की खेप रायपुर रेलवे स्टेशन पहुंचती रही है। इसके बावजूद रेलवे की निगरानी व्यवस्था को इसकी जानकारी नहीं मिल पाई। प्रतिबंध लागू होने के बाद भी ट्रेन के जरिए इतनी बड़ी मात्रा में संदिग्ध पनीर का पहुंचना निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग अब यह भी जांच कर रहा है कि पहले इस तरह की खेप कितनी बार रायपुर पहुंची और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।

जांच के दौरान खुलासा हुआ कि मिल्क मैजिक कंपनी के बंद होने के बाद भी उससे जुड़े कुछ लोगों ने पनीर सप्लाई का नेटवर्क जारी रखा। कंपनी का पूर्व सुपरवाइजर राजेश तिवारी भोपाल शिफ्ट हो गया, जहां से वह इस नेटवर्क का संचालन कर रहा था। वहीं से कंपनी से जुड़कर काम करने लगा। बताया जा रहा है कि उसने भोपाल की लीज कंपनी 'बालाजी' के माध्यम से रायपुर, छत्तीसगढ़ और ओडिशा तक पनीर भेजने की व्यवस्था संभाल रखी थी।

बताया गया कि पूरी सप्लाई प्रक्रिया की निगरानी राजेश तिवारी भोपाल से करता था। रेलवे स्टेशन से लेकर बस स्टैंड तक अलग-अलग लोगों की जिम्मेदारियां तय की गई थीं। रायपुर रेलवे स्टेशन पर पनीर उतारने का काम बालाजी कंपनी का कर्मचारी अनिल कुमार करता था। इसके बाद दूसरा अनिल पनीर को स्टेशन से बस स्टैंड तक पहुंचाता था।

बस में पनीर लोड करने के बाद उसकी तस्वीर मोबाइल के जरिए राजेश तिवारी को भेजी जाती थी, जिसके बाद संबंधित व्यक्ति की जिम्मेदारी समाप्त हो जाती थी। जांच में यह भी सामने आया कि बिलासपुर का रहने वाला लोकेश भी इस सप्लाई चेन का हिस्सा था। यह संदिग्ध पनीर आगे जगदलपुर और ओडिशा भेजे जाने की तैयारी थी।

फूड विभाग के नोडल अधिकारी डोमेंद्र ध्रुव ने बताया कि प्रदेश में एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लागू है। ट्रेन के माध्यम से अवैध रूप से पनीर सप्लाई किए जाने की सूचना मिलने पर टीम ने कार्रवाई करते हुए पूरी खेप जब्त की और उसके नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

CG Janvani Team

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