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| BSP लोहा चोरी मामले में पूर्व GM हिमांशु भूषण मलिक को हाईकोर्ट से जमानत। |
BSP लोहा चोरी मामला पुरानी भिलाई थाने में दर्ज है। यह केस ब्लास्ट फर्नेस विभाग से फ्लू डस्ट के कथित अवैध परिवहन और स्क्रैप चोरी से जुड़ा है। शुरुआती जांच में पुलिस को दो ट्रकों, CG-04-QT-8797 और CG-08-AW-1475, से BSP के ब्लास्ट फर्नेस विभाग से फ्लू डस्ट ले जाने की शिकायत मिली थी।
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को इन ट्रकों में ले जाए जा रहे कुछ फेरस स्क्रैप के BSP की संपत्ति होने का संदेह हुआ। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया और स्क्रैप चोरी तथा कथित हेराफेरी से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की गई। इसी क्रम में पूर्व GM हिमांशु भूषण मलिक को भी मामले में आरोपी बनाया गया और 9 जुलाई को गिरफ्तार किया गया।
मास्टरमाइंड समेत 17 आरोपी जेल भेजे गए
इस मामले में पुलिस ने कथित मास्टरमाइंड संजय सिंह समेत 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान स्क्रैप यार्ड से जुड़े लोगों की भूमिका भी सामने आई। इसी आधार पर हिमांशु भूषण मलिक को भी आरोपी बनाया गया।
पुलिस के मुताबिक, मलिक स्क्रैप यार्ड के संचालन और निगरानी से जुड़े थे। उनके जिम्मे यार्ड की निगरानी के साथ स्क्रैप के स्टॉक का रिकॉर्ड बनाए रखना था। जांच एजेंसी का आरोप है कि स्टॉक रिकॉर्ड सही तरीके से नहीं रखा गया और यार्ड की निगरानी में भी लापरवाही हुई।
जांच एजेंसी के अनुसार, इन परिस्थितियों के कारण स्क्रैप की कथित चोरी और हेराफेरी को आसानी हुई। इसी आधार पर मामले में मलिक की भूमिका की जांच की गई।
FIR में नाम नहीं होने का बचाव पक्ष का तर्क
हाईकोर्ट में मलिक की ओर से उनके वकील ने इन आरोपों को चुनौती दी। बचाव पक्ष ने कहा कि FIR में मलिक का नाम दर्ज नहीं है। उनके खिलाफ मुख्य आधार सह-आरोपी का मेमो बयान है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि करने वाला ठोस सबूत उपलब्ध नहीं है।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि मलिक की जिम्मेदारी केवल स्क्रैप यार्ड की निगरानी तक थी, जबकि प्लांट की सुरक्षा की जिम्मेदारी CISF के पास थी। इसलिए केवल निगरानी में लापरवाही के आरोप के आधार पर उन्हें चोरी में शामिल नहीं माना जा सकता।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि मलिक जांच में सहयोग कर रहे थे और जरूरत पड़ने पर जांच अधिकारी के सामने पेश हुए। उनकी ओर से गिरफ्तारी के समय जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने की बात भी रखी गई।
राज्य की ओर से जमानत याचिका का विरोध किया गया। हालांकि, केस डायरी और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने मलिक को जमानत देने का फैसला किया।
चार्जशीट पहले ही कोर्ट में पेश
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि हिमांशु भूषण मलिक का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। अदालत के समक्ष यह भी रखा गया कि मामले में चार्जशीट पहले ही पेश की जा चुकी है और मलिक 9 जुलाई से हिरासत में हैं।
इसी मामले के एक सह-आरोपी को 4 अगस्त को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल चुकी है। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने मलिक को समानता के आधार पर जमानत का हकदार माना।
कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई पूरी होने में समय लग सकता है। मलिक को दो स्थानीय जमानतदार और व्यक्तिगत बंधपत्र पेश करने के बाद रिहा किया जाएगा। जमानत के साथ अदालत ने कुछ शर्तें भी तय की हैं।
मलिक को ट्रायल की निर्धारित तारीखों पर कोर्ट में उपस्थित रहना होगा। गवाहों की गवाही के दौरान वे अनावश्यक रूप से स्थगन की मांग नहीं कर सकेंगे। आरोप तय होने और कोर्ट में बयान दर्ज होने जैसी महत्वपूर्ण तारीखों पर उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य होगी।
