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| BSP लोहा चोरी मामले में अभय सिंह को हाईकोर्ट से जमानत मिली। |
अभय सिंह का नाम मामले की मूल FIR में नहीं था। पुलिस जांच आगे बढ़ने के बाद उसका नाम आरोपी के तौर पर सामने आया। कोर्ट के सामने यह भी बताया गया कि अभय के खिलाफ पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने उसे जमानत दी।
अभय सिंह इस मामले में जमानत पाने वाला तीसरा आरोपी है। इससे पहले व्यवसायी हिमांशु खंडेलवाल को 4 अगस्त को अग्रिम जमानत और पूर्व BSP GM हिमांशु भूषण मलिक को 10 अगस्त को नियमित जमानत मिल चुकी है।
अभय के वकील ने सुनवाई के दौरान इन दोनों जमानत आदेशों का हवाला दिया। उनका कहना था कि समान आरोपों में दूसरे आरोपियों को राहत मिल चुकी है, इसलिए अभय सिंह को भी जमानत दी जानी चाहिए।
कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पेश करने पर अभय सिंह को रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, जमानत के साथ कोर्ट ने कुछ शर्तें भी तय की हैं।
अभय सिंह को जांच और ट्रायल में सहयोग करना होगा। इसके अलावा वह किसी गवाह को प्रभावित नहीं कर सकेगा और हर सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित रहना होगा।
पुलिस के मुताबिक, BSP के ब्लास्ट फर्नेस विभाग से आयरन स्क्रैप और डस्ट फ्लू की आड़ में लोहा बाहर निकालने के मामले में संजय सिंह को मुख्य आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने उसके बेटे अभय सिंह पर भी मामले में शामिल होने का आरोप लगाया है।
केस दर्ज होने के बाद अभय सिंह फरार चल रहा था। पुलिस ने संजय सिंह और अभय सिंह दोनों की गिरफ्तारी पर 10-10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था और दोनों को भगोड़ा घोषित किया गया था। बाद में पुलिस ने संजय सिंह को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
इसी मामले में गुरुवार को मुख्य आरोपी संजय सिंह और पूर्व भाजपा नेता भास्कर मुदलियार को दुर्ग जेल से बेमेतरा जेल शिफ्ट कर दिया गया। हालांकि, दोनों को अचानक दूसरी जेल भेजे जाने की वजह अभी स्पष्ट नहीं है।
वहीं, जमानत मिलने के बाद व्यवसायी हिमांशु खंडेलवाल गुरुवार को जमानत से जुड़े दस्तावेज लेकर भिलाई थाने पहुंचे। पुलिस की ओर से जरूरी कार्रवाई पूरी नहीं होने के कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा। अब दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनकी रिहाई की आगे की कार्रवाई होगी।
