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| छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हत्या मामले में देवप्रकाश यादव की उम्रकैद की सजा रद्द कर उसे बरी किया। |
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक मुकेश की मौत सिर में चोट लगने से हुए सदमे और अधिक रक्तस्राव के कारण हुई थी।
पुलिस जांच और चार्जशीट के आधार पर जांजगीर-चांपा के तीसरे अपर सत्र न्यायाधीश ने 10 अप्रैल 2015 को मामले में फैसला सुनाया था। निचली अदालत ने बंशी यादव को दोषमुक्त कर दिया, जबकि उसके बेटे देवप्रकाश यादव को उम्रकैद की सजा दी थी।
देवप्रकाश यादव ने उम्रकैद की सजा के खिलाफ अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला के माध्यम से हाईकोर्ट में अपील दायर की। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया।
कोर्ट ने पाया कि हत्या की घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी उपलब्ध नहीं था। मृतक के परिजनों ने केवल यह आशंका जताई थी कि मुकेश आरोपी के घर गया था और वहां से वापस नहीं लौटा। किसी गवाह ने आरोपी को मुकेश की हत्या करते हुए देखने की बात नहीं कही।
मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के. अग्रवाल और राधाकिशन अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए देवप्रकाश यादव को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 201 के आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट के फैसले का आधार यह रहा कि केवल अनुमान और आशंका के आधार पर दोषसिद्धि कायम नहीं रखी जा सकती।
