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| दुर्ग जिला अस्पताल की MCH यूनिट का WHO से जुड़ी स्वास्थ्य टीम ने निरीक्षण किया। |
दोपहर करीब 12 बजे दो सदस्यीय टीम जिला अस्पताल पहुंची। WHO के डॉ. अरुण कुमार सिंह ने अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान MCH यूनिट की इंचार्ज डॉ. विनीता धुर्वे ने टीम को MCH और SNCU की व्यवस्थाओं की जानकारी दी। इसके बाद सिविल सर्जन डॉ. आशीष मिंज और अस्पताल के डॉक्टरों व अधिकारियों के साथ करीब एक घंटे बैठक हुई।
बैठक में मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कई बिंदुओं पर चर्चा की गई। इसके बाद टीम ने लेबर वार्ड के स्टाफ से बातचीत कर Normal Delivery को बढ़ावा देने के लिए जरूरी बदलावों पर सुझाव दिए।
सिजेरियन की बढ़ती संख्या पर चिंता
डॉ. विनीता धुर्वे के मुताबिक अस्पताल में फिलहाल C-Section Delivery की संख्या बढ़ रही है, जबकि Normal Delivery कम हो रही है। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए WHO टीम ने लेबर रूम के सेटअप और वहां काम करने के तरीके में बदलाव के सुझाव दिए।
टीम ने प्रसव के दौरान महिला को ज्यादा सहज माहौल देने पर जोर दिया। इसके लिए महिला की पसंद के व्यक्ति को बर्थ कम्पेनियन यानी जन्म सहयोगी के तौर पर साथ रखने का सुझाव दिया गया। इसका उद्देश्य प्रसव के दौरान महिला को मानसिक सहारा और ज्यादा आरामदायक माहौल उपलब्ध कराना है।
महिला को बच्चे की धड़कन सुनाने पर जोर
WHO टीम ने डॉप्लर की सुविधा शुरू करने का सुझाव भी दिया। टीम के मुताबिक डॉप्लर की मदद से गर्भ में पल रहे बच्चे की धड़कन सुनी और उसकी गति जानी जा सकती है।
टीम ने अस्पताल के स्टाफ को यह प्रक्रिया महिला को भी समझाने का सुझाव दिया, ताकि वह बच्चे की धड़कन सुन सके और इसके बारे में स्वास्थ्यकर्मियों को बता सके। Source के अनुसार, सामान्य तरीके से धड़कन सुनना संभव होने से पहले भी करीब 12 सप्ताह की गर्भावस्था में डॉप्लर से बच्चे की धड़कन का पता लगाया जा सकता है।
डिलीवरी के लिए आरामदायक पोजीशन का सुझाव
WHO टीम ने प्रसव के दौरान महिलाओं की सुविधा के अनुसार पोजीशन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। टीम ने केवल एक तय व्यवस्था में डिलीवरी कराने के बजाय महिला को उस पोजीशन में प्रसव कराने का सुझाव दिया, जिसमें वह खुद को ज्यादा सहज महसूस करे।
इसके लिए डिलीवरी टेबल की जगह बेड के इस्तेमाल का सुझाव दिया गया। साथ ही लेबर वार्ड में महिलाओं की प्राइवेसी बेहतर करने के लिए पर्दों की जगह पार्टिशन लगाने की बात कही गई, ताकि प्रत्येक महिला के लिए अलग स्पेस उपलब्ध कराया जा सके।
अनावश्यक इंडक्शन से बचने की सलाह
टीम ने प्रसव के दौरान अनावश्यक इंडक्शन नहीं करने की सलाह दी। महिलाओं को मूवमेंट और एक्सरसाइज की सुविधा देने के लिए बर्थिंग बॉल रखने का सुझाव भी दिया गया।
इसके अलावा प्रसव के दौरान महिलाओं को रिलैक्स रखने के लिए म्यूजिक चलाने का सुझाव दिया गया। टीम के मुताबिक, इससे महिला को आराम महसूस करने में मदद मिल सकती है और प्रसव की प्रक्रिया में सहयोग मिल सकता है।
डिलीवरी के बाद ऑक्सीटोसिन को लेकर सुझाव
प्रसव के बाद ऑक्सीटोसिन के इस्तेमाल को लेकर भी स्वास्थ्यकर्मियों को जानकारी दी गई। WHO टीम ने सुझाव दिया कि डिलीवरी के बाद प्लेसेंटा निकलने के बाद ऑक्सीटोसिन दिया जाए।
निरीक्षण के दौरान टीम ने MCH यूनिट के साथ लेबर वार्ड की व्यवस्थाओं को भी देखा और स्टाफ से सीधे बातचीत की। अस्पताल स्तर पर Normal Delivery को बढ़ावा देने और प्रसव के दौरान महिलाओं के लिए अधिक सहज माहौल तैयार करने से जुड़े सुझाव बैठक में सामने आए।
