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| छत्तीसगढ़ में गोल्डन आवर और सरल डिजिटल प्लेटफॉर्म का लोकार्पण। |
'गोल्डन आवर' प्लेटफॉर्म को आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए विकसित किया गया है। यह सीएमएचओ कार्यालय, इमरजेंसी मेडिकल सर्विस (ईएमएस), अस्पतालों और डॉक्टरों को एक डिजिटल नेटवर्क पर जोड़ने का काम करेगा। इसके जरिए एम्बुलेंस की रियल टाइम ट्रैकिंग की जा सकेगी। साथ ही उपलब्ध बेड के आधार पर अस्पताल का चयन, मरीजों का सुरक्षित रेफरल और आपात सेवा में घटनाओं की नजर भी आसान होगी। इससे नाजुक मरीजों को समय पर इलाज प्राप्त कराने में मदद मिलने की संभावना है।
वहीं 'सरल' यानी सिंप्लीफाइड एक्सेस टू रायपुर एडमिनिस्ट्रेटिव लिंक्स प्लेटफॉर्म को सरकारी प्रक्रियाओं को आसान और तेज बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इस प्लेटफॉर्म से विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और नागरिकों को सरकारी सेवाएं कम समय में अधिक सुगमता के साथ मिल सकेंगी।
इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि अच्छा शाशन और लोक कल्याण के लिए टेक्निकल समस्या का प्रभावी उपयोग आज की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस तरह के नवाचार राज्य में डिजिटल परिवर्तन को गति देंगे और नागरिकों तक बेहतर सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
आईटी आईबीएफ आईआईटी भिलाई के विष्णु वैभव द्विवेदी ने बताया कि 'सरल' एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है। इसमें नागरिक सेवाओं, सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध होगी। यदि किसी व्यक्ति को रोजगार से जुड़ी जानकारी चाहिए या सरकारी योजनाओं के बारे में जानना है, तो वह सीधे गूगल पर 'सरल' सर्च करके वेबसाइट पर आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सकता है।
इसके अलावा यदि किसी नागरिक को शिकायत दर्ज करानी हो या शासन को सुझाव देना हो, तो अलग-अलग पोर्टल पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी। यह सुविधा एक ही प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपलब्ध रहेगी, जिससे लोगों का समय भी बचेगा और प्रक्रियाएं भी आसान होंगी।
इसी तरह 'गोल्डन आवर' प्लेटफॉर्म सीएमएचओ कार्यालय, एम्बुलेंस स्टाफ, अस्पतालों और डॉक्टरों को एक साझा डिजिटल मंच पर जोड़ता है। यह एम्बुलेंस चालकों को वास्तविक समय में सबसे छोटे और सुविधाजनक मार्ग की जानकारी उपलब्ध कराता है। साथ ही आसपास के अस्पतालों, वहां उपलब्ध बेड और आईसीयू की स्थिति तथा डॉक्टरों की उपलब्धता की जानकारी भी इसी प्लेटफॉर्म पर मिलेगी।
इस व्यवस्था का लाभ यह होगा कि मरीज को अस्पताल पहुंचाने से पहले ही संबंधित अस्पताल को सूचना भेजी जा सकेगी, जिससे डॉक्टर इलाज की तैयारी पहले से कर सकेंगे। विशेष रूप से सड़क दुर्घटना या अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में घायल मरीजों के लिए यह सुविधा काफी उपयोगी साबित होगी।
