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| दुर्ग में ड्रिंक एंड ड्राइव मामले में यात्री बस चालक को अदालत ने जुर्माना और जेल की सजा सुनाई। |
मामला उस समय सामने आया जब सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए ट्रैफिक पुलिस विशेष वाहन जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान राजनांदगांव-दुर्ग-भिलाई मार्ग पर संचालित गुरुनानक ट्रेवल्स की एक यात्री बस को जांच के लिए रोका गया।
जांच के समय बस में बड़ी संख्या में यात्री मौजूद थे। पुलिस को चालक जितेंद्र देवांगन के व्यवहार पर संदेह हुआ, जिसके बाद उसका ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट कराया गया। जांच रिपोर्ट में शराब पीने की पुष्टि हुई। इससे साफ हुआ कि चालक नशे की हालत में यात्रियों से भरी बस चला रहा था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, सार्वजनिक यात्री बस को नशे की स्थिति में चलाना गंभीर लापरवाही की श्रेणी में आता है। ऐसी स्थिति में बस में सफर कर रहे यात्रियों के साथ-साथ सड़क पर मौजूद अन्य वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती थी।
इसी आधार पर ट्रैफिक पुलिस ने चालक के खिलाफ मोटरयान अधिनियम की धारा 185 और 184 के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की।
इसके बाद जांच रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के साथ पूरा प्रकरण मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) दुर्ग की अदालत में पेश किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने चालक को दोषी ठहराया और उस पर 15 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के साथ तीन दिन के साधारण कारावास की सजा सुनाई।
पुलिस के मुताबिक, दुर्ग जिले में यह पहला मामला है जिसमें शराब के नशे में यात्री बस चलाने वाले चालक को जेल भेजा गया है। अधिकारियों का मानना है कि अदालत के इस फैसले से ड्रिंक एंड ड्राइव करने वालों के बीच कड़ा संदेश जाएगा।
