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| कृषि ऋणमाफी योजना के मामले में किसानों ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। |
किसानों ने यह भी आग्रह किया है कि जब तक पूरे मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनके खिलाफ ऋण वसूली, कुड़की और भूमि नीलामी जैसी कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि यदि समान परिस्थितियों वाले खातों में अलग-अलग तरीके से ऋणमाफी का लाभ दिया गया है तो इसकी जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।
किसान बंधु संगठन के बाबा टेक सिंह चंदेल के नेतृत्व में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे। किसानों ने बताया कि 30 जून को कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में बैंक से जुड़े किसानों के मामलों पर चर्चा हुई थी। किसानों के अनुसार, कलेक्टर के निर्देश के बाद बैंक ने उन किसानों की बकाया सूची उपलब्ध कराई जिन्हें ऋणमाफी का लाभ मिला और जिन्हें योजना से वंचित रखा गया।
किसानों और संगठन का दावा है कि उपलब्ध कराई गई सूची का मिलान और अवलोकन करने पर कई मामलों में अंतर दिखाई दिया। उनका आरोप है कि वर्ष 2018-19 में एनपीए घोषित कुछ कृषि ऋण खातों को बैंक अधिकारियों द्वारा ऋणमाफी के लिए अपात्र बताया जा रहा है, जबकि उसी अवधि में एनपीए घोषित अन्य खाताधारकों को ऋणमाफी या संबंधित छूट का लाभ दिया गया।
किसानों का कहना है कि यदि एक ही गांव, समान परिस्थितियों और एक जैसी श्रेणी के खातों में योजना का लाभ अलग-अलग तरीके से दिया गया है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
प्रभावित किसानों ने बैंक की नेहरू नगर भिलाई, चरोदा और दुर्ग शाखाओं से जुड़े कृषि ऋणमाफी मामलों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। किसानों ने वर्ष 2018-19 में एनपीए घोषित सभी कृषि ऋण खातों का रिकॉर्ड जुटाकर यह जांच कराने की मांग की है कि किन नियमों और पात्रता मापदंडों के आधार पर कुछ किसानों को योजना का लाभ दिया गया और अन्य किसान इससे वंचित रह गए।
किसानों ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक प्रभावित किसानों के खिलाफ वसूली, कुड़की और भूमि नीलामी की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। साथ ही जिन पात्र किसानों को बिना किसी वैधानिक कारण के योजना का लाभ नहीं मिला है, उन्हें नियमानुसार ऋणमाफी या समतुल्य राहत उपलब्ध कराई जाए।
इसके अलावा किसानों ने बैंक द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची का सक्षम अधिकारी से धरातलीय सत्यापन कराने की भी मांग रखी है। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा, फसल नुकसान और आर्थिक संकट को देखते हुए बकाया कृषि ऋण पर ब्याज और दंडात्मक शुल्क में भी राहत दी जानी चाहिए।
किसानों ने यह भी मांग की है कि यदि जांच के दौरान बैंक अधिकारियों की ओर से किसी प्रकार की अनियमितता, पक्षपात या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाए।
