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| कुम्हारी की शासकीय उचित मूल्य दुकान में खाद्यान्न की कमी मिलने के बाद खाद्य विभाग ने एफआईआर दर्ज कराई। |
मामले में जय मां बमलेश्वरी महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष दुलारी बया, संचालक रोहिणी जांगड़े और कमलेश वर्मा को आरोपी बनाया गया है। तीनों पर शासन के राशन का अन्य कार्यों में उपयोग करने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। इनके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 3 और 7 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
खाद्य नियंत्रक दुर्ग ने 30 जुलाई 2026 को आदेश जारी कर खाद्य निरीक्षक सुधा महिलांग को कुम्हारी स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान (आईडी-431006014) के संचालकों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद 3 अगस्त को कुम्हारी थाने में शिकायत दर्ज कराई गई।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
पूरे मामले की जांच दूरभाष पर मिली शिकायत के बाद शुरू हुई थी। शिकायत में बताया गया था कि दुकान नियमित समय पर नहीं खुलती, हितग्राहियों को समय पर राशन नहीं मिलता और कई लोगों को बिना राशन लौटना पड़ता है। इसके बाद 31 मार्च 2025 को खाद्य निरीक्षक ने मौके पर पहुंचकर जांच की, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।निरीक्षण के दौरान दुकान में शासन की ओर से लगाया जाने वाला पीला बोर्ड नहीं मिला। इसके अलावा मूल्य सूची, स्टॉक बोर्ड, निगरानी समिति का बोर्ड और टोल फ्री नंबर भी प्रदर्शित नहीं था। मौके पर स्टॉक रजिस्टर, वितरण पंजी, चावल उत्सव पंजी तथा निगरानी समिति की बैठक से जुड़े अभिलेख भी उपलब्ध नहीं पाए गए।
स्टॉक के भौतिक सत्यापन में मिली बड़ी कमी
भौतिक सत्यापन के दौरान खाद्यान्न के स्टॉक में सबसे बड़ी गड़बड़ी सामने आई। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार दुकान में 869.82 क्विंटल चावल उपलब्ध होना चाहिए था, जबकि मौके पर केवल 13 क्विंटल चावल मिला। इस तरह शुरुआती जांच में 856.82 क्विंटल चावल कम पाया गया।बाद में विभागीय प्रकरण और दोबारा सत्यापन के बाद कुल कमी 863.07 क्विंटल चावल और 0.80 क्विंटल शक्कर दर्ज की गई। विभाग ने इस पूरी मात्रा की वसूली के आदेश भी जारी कर दिए हैं।
जांच रिपोर्ट के आधार पर हुई कार्रवाई
जांच के दौरान यह शिकायत भी सही पाई गई कि दुकान नियमित रूप से समय पर नहीं खोली जाती थी। खाद्य निरीक्षक के प्रतिवेदन के अनुसार दुकान संचालक ने स्वीकार किया कि स्टॉक कम होने की वजह से दुकान समय पर नहीं खुलती थी और सभी हितग्राहियों को राशन उपलब्ध नहीं कराया जा सकता था।खाद्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट में माना कि दुकान संचालकों ने छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2016 और अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन किया है। इसी आधार पर कलेक्टर के आदेश के बाद खाद्य नियंत्रक ने एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जारी किए।
