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| जयंती स्टेडियम में श्री शिवमहापुराण कथा के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा जी। |
शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि सरकार का स्पष्ट विश्वास है कि शिक्षा केवल ज्ञान और रोजगार हासिल करने का माध्यम नहीं है। इसके साथ चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों और संस्कारों को भी विद्यार्थियों के विकास का हिस्सा बनाया जाना जरूरी है, ताकि एक सशक्त और संस्कारवान पीढ़ी तैयार हो सके।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों से समृद्ध नई पीढ़ी ही विकसित एवं सशक्त छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव बनेगी। इसी सोच के तहत प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में ज्ञान के साथ संस्कार, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के जीवन-मूल्यों को शामिल करना प्राथमिकता है।
इस दौरान भव्य धार्मिक आयोजन के संयोजक श्री दया सिंह जी को विश्व के सबसे बड़े अस्थायी पंडाल का वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित करने के लिए बधाई दी गई। इस उपलब्धि को आयोजकों के साथ-साथ पूरे छत्तीसगढ़ और दुर्ग अंचल के लिए गौरव का विषय बताया गया।
जयंती स्टेडियम में आयोजित कथा के दौरान प्रदेश के सभी शासकीय विद्यालयों में प्रार्थना एवं मंत्रोच्चार की पहल का भी उल्लेख हुआ। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि भिलाई के कथा स्थल में व्यासपीठ से पंडित प्रदीप मिश्रा जी द्वारा इस पहल की सराहना किया जाना उत्साहवर्धक और प्रेरणादायी है।
शिक्षा व्यवस्था में संस्कार और अनुशासन को महत्व देने के पीछे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की सोच है। सरकार का मानना है कि शिक्षा तभी पूर्ण मानी जा सकती है, जब वह विद्यार्थियों को केवल ज्ञानवान ही नहीं, बल्कि संस्कारवान, अनुशासित और अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़े नागरिक के रूप में भी विकसित करे।
गजेंद्र यादव ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास और संस्कारयुक्त शिक्षा की दिशा में यह पहल सकारात्मक और दूरगामी परिणाम देने वाली होगी। उन्होंने पंडित प्रदीप मिश्रा जी की सराहना और आशीर्वचन के लिए हृदय से आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया।
