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| पुलिस अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश पर हाईकोर्ट की रोक। |
यह मामला एडिशनल एसपी ऋचा मिश्रा की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वरिष्ठता सूची की अनदेखी करते हुए जूनियर अधिकारियों को एसपी और कमांडेंट का प्रभार दिया गया, जबकि याचिकाकर्ता को डिप्टी कमांडेंट के पद पर पोस्टेड किया गया।
20 जुलाई को जारी हुआ था ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश
राज्य शासन ने 20 जुलाई को पुलिस अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का आदेश जारी किया था। इस आदेश में अधिकारियों को एसपी और कमांडेंट का प्रभार दिया गया था। वरिष्ठ अधिकारियों की अनदेखी और जूनियर अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों का प्रभार दिए जाने के आरोप के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
एएसपी ऋचा मिश्रा ने दाखिल की याचिका
एडिशनल एसपी ऋचा मिश्रा ने अपनी याचिका में कहा है कि एडिशनल एसपी की ग्रेडेशन लिस्ट में उनका नाम 35वें नंबर पर है। इसके बावजूद उनसे जूनियर अधिकारियों को एसपी और कमांडेंट का प्रभार दिया गया।
याचिका में यह भी कहा गया है कि ऋचा मिश्रा के सीनियर होने के बावजूद उन्हें डिप्टी कमांडेंट के पद पर पोस्टेड किया गया, जबकि जूनियर अधिकारियों को सूची में उनसे ऊपर रखते हुए एसपी और कमांडेंट का प्रभार दिया गया।
2014 के सर्कुलर का दिया गया हवाला
ऋचा मिश्रा की ओर से दाखिल याचिका में राज्य सरकार के 14 जुलाई 2014 के सर्कुलर का भी हवाला दिया गया है। इसमें स्पष्ट निर्देश होने की बात कही गई है कि किसी सीनियर अधिकारी को सुपरसीड कर जूनियर अफसर को उच्च पद का प्रभार नहीं दिया जाएगा।
हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक लगाई रोक
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत दी है। अदालत ने 20 जुलाई 2026 को जारी पुलिस अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग आदेश के क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार समेत अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को होगी।
