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| बाबा बैद्यनाथ यात्रा के दौरान मनी चंद्रा की मौत। |
मनी चंद्रा दुर्ग के गया नगर के रहने वाले थे और करीब 35 कांवड़ियों के जत्थे के साथ बाबा धाम यात्रा पर निकले थे। यह जत्था दुर्ग से रवाना होकर एक हजार किलोमीटर से ज्यादा का सफर तय करने के बाद बिहार के सुल्तानगंज पहुंचा था। सोमवार, 10 अगस्त को सभी कांवड़ियों ने सुल्तानगंज में गंगा स्नान किया और इसके बाद गंगाजल लेकर चलकर जा देवघर के लिए निकल पड़े ।
मंगलवार रात जत्था सुल्तानगंज से करीब 27 किलोमीटर आगे मनिया मोड़ के पास पहुंचा था। इसी दौरान मनी के सीने में अचानक तेज दर्द उठा और कुछ ही देर में उनकी हालत गंभीर हो गई। साथियों ने उन्हें संभाला और तत्काल रास्ते में बनाए गए अस्थायी स्वास्थ्य शिविर में लेकर पहुंचे।
शिविर में मौजूद डॉक्टरों ने मनी की जांच की और उनकी हालत देखकर उपचार की कोशिश की। इसके बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। जांच के बाद डॉक्टरों ने मनी को मृत घोषित कर दिया। शुरुआती तौर पर मौत की वजह हार्ट अटैक होने की आशंका जताई गई है, जबकि वास्तविक वजह पोस्टमॉर्टम और मेडिकल जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
मनी अपने साथियों के साथ बाबा बैद्यनाथ के दर्शन करने और गंगाजल चढ़ाने की इच्छा लेकर सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर सुल्तानगंज पहुंचे थे। वहां से गंगाजल लेकर उन्हें पैदल देवघर जाना था, लेकिन देवघर पहुंचने से करीब 100 किलोमीटर पहले ही उनकी मौत हो गई।
मनी की मौत की खबर मिलते ही साथ चल रहे कांवड़ियों में शोक फैल गया। कुछ समय के लिए कांवड़िया पथ पर भी माहौल गमगीन हो गया। साथियों ने अपनी यात्रा रोककर घटना की जानकारी मनी के परिजनों को दी।
मनी की पत्नी ने आरोप लगाया कि उनके पति को सही इलाज नहीं मिल सका। उन्होंने कहा, "अगर उन्हें वहां के प्रशासन की ओर से समय पर सही ट्रीटमेंट मिल जाता तो मेरे पति आज जिंदा होते। मेरी दो छोटी-छोटी बच्चियां हैं, अब मैं उनका पालन-पोषण कैसे करूंगी?"
अब मनी चंद्रा का शव दुर्ग लाने की तैयारी की जा रही है। शव दुर्ग पहुंचने के बाद उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
