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| ग्राम कर्रा के बाबा कर्मेश्वर धाम में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय। |
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने ग्राम कर्रा में मंगल भवन निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बाबा कर्मेश्वर की कृपा से क्षेत्र लगातार विकास के रास्ते पर आगे बढ़े, इसके लिए राज्य सरकार जरूरी विकास कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाएगी।
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने श्री महारुद्र यज्ञ और शिव पुराण कथा के आयोजन को सौभाग्य का विषय बताया। उन्होंने कथावाचक आचार्य दिव्यानंद जी महाराज को नमन करते हुए आयोजन समिति और श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना के महत्व का उल्लेख करते हुए प्रदेश में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ धर्म, संस्कृति और आस्था की समृद्ध परंपराओं वाली भूमि है। उन्होंने माता कौशल्या की जन्मभूमि और प्रभु श्रीराम के ननिहाल के रूप में प्रदेश के धार्मिक महत्व का उल्लेख किया। उनके अनुसार, राज्य के गांवों में मौजूद प्राचीन शिवालय, देवी मंदिर और लोक आस्था के केंद्र इस विरासत का हिस्सा हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए काम कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों को धार्मिक कॉरिडोर के रूप में जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उनके मुताबिक इससे श्रद्धालुओं को सुविधाएं मिलने के साथ धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार व आजीविका के अवसर पैदा करने में मदद मिलेगी।
रामलला दर्शन योजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक लगभग 50 हजार श्रद्धालु योजना के माध्यम से अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का भगवान श्रीराम से गहरा संबंध है और योजना के जरिए प्रदेश के श्रद्धालुओं को अयोध्या में दर्शन का अवसर मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ नागरिकों की तीर्थ यात्रा की इच्छा को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई तीर्थ दर्शन योजना की भी जानकारी दी। उनके अनुसार, इस योजना के तहत देश के 19 प्रमुख तीर्थ स्थलों को चिन्हांकित किया गया है और अब तक लगभग 10 हजार श्रद्धालु इसका लाभ लेकर विभिन्न तीर्थ स्थलों के दर्शन कर चुके हैं।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की दिशा में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक हिंसा से प्रभावित रहे क्षेत्रों में शांति और विकास का वातावरण बन रहा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, संचार और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प प्रदेश के अंतिम छोर तक बसे परिवारों तक विकास का लाभ पहुंचाना है। मुख्यमंत्री ने कर्रा सहित बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में विकास कार्यों को आगे भी गति देने और क्षेत्र की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ जरूरी सुविधाओं के विस्तार की बात कही।
ग्राम कर्रा का बाबा कर्मेश्वर धाम स्थानीय स्तर पर लंबे समय से आस्था का केंद्र माना जाता है। उपलब्ध स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां स्थित शिवलिंग प्राकृतिक रूप से प्रकट हुआ था। जनश्रुतियों में इसका संबंध लगभग नौवीं-दसवीं शताब्दी से बताया जाता है, जब साल के वृक्ष के खोल में शिवलिंग की उत्पत्ति होने की बात कही जाती है।
स्थानीय परंपराओं के अनुसार बाबा कर्मेश्वर धाम का संबंध क्षेत्र की वर्षा और धार्मिक आस्थाओं से भी रहा है। ऐसी जनश्रुतियों में बताया जाता है कि कम वर्षा होने पर ग्रामीण भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करते थे। शिवलिंग पर गाय के गोबर का लेप लगाने की भी एक पारंपरिक मान्यता का उल्लेख मिलता है। ये बातें स्थानीय लोक आस्था और जनश्रुतियों के रूप में प्रस्तुत की जाती हैं।
वर्तमान में श्री कर्मेश्वर महादेव मंदिर जीर्णोद्धार समिति की ओर से मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले इस क्षेत्र में विकास और सुविधाओं के विस्तार की प्रतिबद्धता जताई।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ‘एक पेड़ मां के नाम 3.0’ अभियान के तहत अपनी माता श्रीमती जसमनी देवी साय के नाम पर रुद्राक्ष का पौधा लगाया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए लोगों से अधिक से अधिक पौधरोपण करने का आह्वान किया।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने भी मंदिर परिसर में बेल का पौधा लगाया। कार्यक्रम में पत्थलगांव विधायक गोमती साय, आईजी दीपक झा, सरगुजा संभागायुक्त नरेंद्र दुग्गा, कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी, गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु मौजूद रहे।
