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| दुर्ग में भाजपा कोर ग्रुप की बैठक के बाद मीडिया से चर्चा करते विजय शर्मा। |
विजय शर्मा ने कहा कि पहले वंदे मातरम् पूरा गाया जाता था, लेकिन बाद में तुष्टीकरण के नाम पर इसे सीमित कर दिया गया। उनके मुताबिक अब देश अपने स्वाभिमान और मान-बिंदुओं के साथ खड़ा है, इसलिए वंदे मातरम् को लेकर पहले की व्यवस्था को ठीक किया जाना चाहिए।
गृहमंत्री ने कहा कि किसी मुद्दे को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा का विरोध करने के चक्कर में देश का विरोध नहीं होना चाहिए। विजय शर्मा के अनुसार वंदे मातरम् और तिरंगा किसी राजनीतिक दल के नहीं हैं और तिरंगा यात्रा भाजपा नहीं, बल्कि देश के नागरिक निकाल रहे हैं।
दिमागी नक्सलवाद पर भी विजय शर्मा ने अपनी बात रखी। पत्रकारों से चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम के बयान का जिक्र होने पर उन्होंने सवाल उठाया कि नक्सल आखिर कहां होता है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद केवल जंगल में नहीं, बल्कि दिमाग में भी होता है।
विजय शर्मा ने कहा कि जब किसी व्यक्ति के दिमाग में नक्सल सोच पैदा होती है, तभी वह हथियार उठाता है। उन्होंने बस्तर में नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों का जिक्र करते हुए कहा कि कई लोगों ने आईईडी विस्फोटों में अपने पैर गंवाए हैं और कई परिवारों ने अपने लोगों को खोया है। उन्होंने सवाल किया कि ऐसी हिंसा पर किसी को गर्व कैसे हो सकता है।
गृहमंत्री ने ताड़मेटला में 76 जवानों की मौत का भी जिक्र किया और कांग्रेस के पुराने रुख पर सवाल उठाए। इसी दौरान उन्होंने कहा, "हमने जंगलों से नक्सल निकाला है, दिमागी नक्सल जिसके होगा दिमाग में, उसे दिमाग से भी निकालेंगे।"
सरकार की आलोचना और दिमागी नक्सलवाद को अलग बताते हुए विजय शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार के खिलाफ बोलने और उसकी आलोचना करने की पूरी आजादी है। सरकार से सवाल करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, समाज में वैमनस्य फैलाना या देश में अराजक स्थिति पैदा करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में सरकार सख्ती से कार्रवाई करेगी।
जेल में बंद करीब 1300 नक्सल आरोपियों की समीक्षा
विजय शर्मा ने सालों से जेल में बंद नक्सल मामलों के आरोपियों को लेकर सरकार की चल रही प्रक्रिया की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुराने प्रकरणों में करीब 1300 लोग जेल में बंद हैं और इन मामलों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर समीक्षा की जा रही है।
सबसे पहले यह देखा जा रहा है कि किन मामलों में जनहानि हुई और किन मामलों में जनहानि नहीं हुई। जिन मामलों में जनहानि नहीं हुई, उन्हें भी दो हिस्सों में बांटा गया है। एक श्रेणी में यूएपीए जैसे केंद्रीय कानून लगे मामले हैं, जबकि दूसरी श्रेणी में ऐसे मामले हैं जिनमें केंद्रीय कानून लागू नहीं हैं।
प्रकरणों की स्थिति की हो रही समीक्षा
गृहमंत्री के मुताबिक फिलहाल उन मामलों पर काम किया जा रहा है जिनमें जनहानि नहीं हुई और केंद्रीय कानून भी लागू नहीं हैं। इन प्रकरणों की स्थिति की समीक्षा की जा रही है।
विजय शर्मा ने पिछली कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि नक्सलवाद से जुड़े मामलों में उसने किसी व्यक्ति को नहीं छोड़ा। उनके अनुसार पिछली सरकार ने ऐसे लोगों को छोड़ा, जिनके मामलों में नक्सलवाद का कोई संबंध नहीं था। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार नक्सल मामलों में कार्रवाई करके दिखाएगी।
