![]() |
| दुर्ग में सरकारी योजना के नाम पर कथित ठगी मामले में कोर्ट के आदेश के बाद एफआईआर दर्ज। |
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के सुपेला थाना क्षेत्र में सरकारी योजनाओं में निवेश के बदले बड़ा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर एक महिला से लाखों रुपये और सोने-चांदी के जेवर लेने का मामला सामने आया है। पुलिस से कार्रवाई नहीं मिलने पर पीड़िता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद न्यायालय के निर्देश पर सुपेला थाना पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318 (4) और 316 (2) के तहत अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
दस्तावेजों और नोटरी इकरारनामे का परीक्षण करने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग ने प्रथम दृष्टया इसे संज्ञेय अपराध माना। अदालत ने सुपेला थाना पुलिस को एफआईआर दर्ज कर पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी।
परिवाद के मुताबिक, फरीद नगर कोहका निवासी रूबी खातून की करीब 18 महीने पहले संजय नगर निवासी सबीना खान से विश्वकर्मा योजना के तहत चल रही स्किल ट्रेनिंग के दौरान पहचान हुई थी। शिकायत में कहा गया है कि आरोपी ने खुद को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी रखने वाली बताते हुए निवेश करने पर बड़ा आर्थिक लाभ मिलने का भरोसा दिलाया।
शिकायत के अनुसार, आरोपी ने सबसे पहले तीन हजार रुपये जमा कराने पर प्रशिक्षण पूरा होने के बाद एक लाख रुपये मिलने की बात कही। इसके बाद बेटे के नाम पर पांच लाख रुपये दिलाने का भरोसा देकर 15 हजार रुपये जमा कराए। यही नहीं, अलग-अलग सरकारी योजनाओं का हवाला देते हुए 50 हजार, 70 हजार, 30 हजार और 20 हजार रुपये समेत कई बार नकद राशि भी ली गई।
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि अधिक मुनाफे का लालच देकर आरोपी ने महिला से सोने की चेन, चांदी की पायल, चांदी के छल्ले और अन्य आभूषण भी उनके मूल बिलों सहित अपने पास रखवा लिए। शिकायत के मुताबिक नकद रकम और जेवरों की कुल कीमत 6.33 लाख रुपये से अधिक बताई गई है।
महिला ने अपने परिवाद में यह भी कहा है कि आरोपी ने पूरे लेन-देन की जानकारी पति या परिवार के अन्य सदस्यों को नहीं बताने की सलाह दी थी। उसे भरोसा दिलाया गया था कि योजना पूरी होने के बाद मिलने वाली बड़ी रकम देखकर परिवार के लोग खुश हो जाएंगे। इसी विश्वास में उसने लंबे समय तक यह बात अपने परिजनों से छिपाकर रखी।
जब महिला ने अपनी रकम और जेवर वापस मांगे तो आरोपी कथित तौर पर टालमटोल करने लगी। इसके बाद 9 जुलाई 2025 को दोनों पक्षों के बीच दो गवाहों की मौजूदगी में नोटरी इकरारनामा तैयार किया गया। इस इकरारनामे में आरोपी ने 4.50 लाख रुपये नकद और सोने-चांदी के आभूषण लेने की बात स्वीकार करते हुए एक माह 10 दिन के भीतर सब कुछ लौटाने का वादा किया था।
परिवाद के अनुसार तय अवधि समाप्त होने के बाद भी आरोपी ने न तो नकद राशि लौटाई और न ही जेवर वापस किए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बाद में कार्रवाई से बचने के उद्देश्य से आरोपी ने पीड़िता के खिलाफ पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत भी दर्ज कराई।
पीड़िता ने पहले सुपेला थाना और उसके बाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत की, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं हुई। इसके बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 174 के तहत नोटिस देकर उसे न्यायालय जाने की सलाह दी गई। इसके बाद महिला ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दुर्ग की अदालत में परिवाद प्रस्तुत किया।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी रवि कुमार महोबिया ने परिवाद, नोटरी इकरारनामा और अन्य दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद कहा कि प्रथम दृष्टया यह केवल दीवानी विवाद नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं का झूठा प्रलोभन देकर धन और आभूषण हासिल करने से जुड़ी आपराधिक धोखाधड़ी का मामला प्रतीत होता है। अदालत ने निष्पक्ष जांच को आवश्यक बताते हुए पुलिस को विधिसम्मत कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
अपने आदेश में अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य तथा साकिरी वासू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। इसी आधार पर सुपेला थाना पुलिस को मामले की विधिवत जांच कर अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए सुपेला थाना पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ बीएनएस की धारा 318 (4) और 316 (2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब नोटरी इकरारनामा, लेन-देन से जुड़े दस्तावेज, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है।
