![]() |
| बिलासपुर के तोरवा मुक्तिधाम में पालतू कुत्ते के अंतिम संस्कार का मामला। |
महापौर पूजा विधानी ने बताया कि पार्षद मोतीलाल गंगवानी ने उन्हें मामले की जानकारी दी थी। इसके बाद उन्होंने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। महापौर के मुताबिक, स्थानीय लोगों और पार्षद की शिकायत के बाद नगर निगम ने संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कदम उठाया।
मामले में नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने केयरटेकर पर पैसे लेने के आरोपों की जांच कराने की बात कही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मुक्तिधाम के केयरटेकर ने 2 हजार रुपए लेकर कुत्ते के दाह-संस्कार की अनुमति दी थी। उनका कहना है कि इसके लिए नगर निगम से किसी तरह की अनुमति नहीं ली गई थी।
स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों ने जताई आपत्ति
मामले की जानकारी मिलने के बाद आसपास के लोग, हिंदू संगठन और वार्ड नंबर 41 के पार्षद मोती गंगवानी मुक्तिधाम पहुंचे। उन्होंने वहां पालतू कुत्ते के दाह-संस्कार का विरोध किया।
विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि मुक्तिधाम इंसानों के अंतिम संस्कार के लिए निर्धारित और पवित्र स्थल है। उनके मुताबिक, यहां किसी पशु का दाह-संस्कार करना धार्मिक परंपराओं और जनभावनाओं के खिलाफ है।
विवाद बढ़ने पर पार्षद की शिकायत पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाइश दी, जिसके बाद मामला शांत कराया गया। यह घटना तोरवा थाना क्षेत्र की है।
पार्षद ने थाने में दी लिखित शिकायत
पार्षद मोती गंगवानी ने इस मामले को लेकर पुलिस में लिखित शिकायत भी दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंसानों के लिए निर्धारित मुक्तिधाम में जानवर का दाह-संस्कार किया गया, जिसे उन्होंने धार्मिक परंपरा और आस्था का अपमान बताया।
पार्षद ने पुलिस से मामले में कार्रवाई की मांग की है। वहीं, स्थानीय लोगों ने भी केयरटेकर पर 2 हजार रुपए लेने का आरोप लगाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग रखी है।
विवाद बढ़ने पर पार्षद की शिकायत पर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाइश दी, जिसके बाद मामला शांत कराया गया। यह घटना तोरवा थाना क्षेत्र की है।
पार्षद ने थाने में दी लिखित शिकायत
पार्षद मोती गंगवानी ने इस मामले को लेकर पुलिस में लिखित शिकायत भी दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंसानों के लिए निर्धारित मुक्तिधाम में जानवर का दाह-संस्कार किया गया, जिसे उन्होंने धार्मिक परंपरा और आस्था का अपमान बताया।
पार्षद ने पुलिस से मामले में कार्रवाई की मांग की है। वहीं, स्थानीय लोगों ने भी केयरटेकर पर 2 हजार रुपए लेने का आरोप लगाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग रखी है।
मालकिन ने कहा- किसी की भावना आहत करना मकसद नहीं
दूसरी ओर, कुत्ते की मालकिन ने कहा कि डॉग उनके परिवार का सदस्य था और उसकी मौत से पूरा परिवार दुखी था। इसी वजह से उन्होंने सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया।
परिवार का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने अपने पालतू डॉग को परिवार के सदस्य की तरह मानते हुए अंतिम विदाई देने की बात कही।
ASP ने कहा- पुलिस हस्तक्षेप का मामला नहीं
मामले में तोरवा थाना प्रभारी रजनीश सिंह से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं, एडिशनल एसपी सिटी पंकज पटेल ने बताया कि एक परिवार के पालतू कुत्ते की मौत हुई थी और परिवार के लोग उससे काफी लगाव रखते थे।
पंकज पटेल के मुताबिक, परिवार डॉग को अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम लेकर गया था और वहां विधि-विधान से दाह-संस्कार किया गया। इसकी जानकारी मिलने के बाद आसपास के लोगों और स्थानीय संगठनों ने मौके पर पहुंचकर आपत्ति जताई और विरोध किया।
दूसरी ओर, कुत्ते की मालकिन ने कहा कि डॉग उनके परिवार का सदस्य था और उसकी मौत से पूरा परिवार दुखी था। इसी वजह से उन्होंने सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया।
परिवार का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने अपने पालतू डॉग को परिवार के सदस्य की तरह मानते हुए अंतिम विदाई देने की बात कही।
ASP ने कहा- पुलिस हस्तक्षेप का मामला नहीं
मामले में तोरवा थाना प्रभारी रजनीश सिंह से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। वहीं, एडिशनल एसपी सिटी पंकज पटेल ने बताया कि एक परिवार के पालतू कुत्ते की मौत हुई थी और परिवार के लोग उससे काफी लगाव रखते थे।
पंकज पटेल के मुताबिक, परिवार डॉग को अंतिम संस्कार के लिए मुक्तिधाम लेकर गया था और वहां विधि-विधान से दाह-संस्कार किया गया। इसकी जानकारी मिलने के बाद आसपास के लोगों और स्थानीय संगठनों ने मौके पर पहुंचकर आपत्ति जताई और विरोध किया।
एडिशनल एसपी ने बताया कि फिलहाल यह मामला पुलिस के हस्तक्षेप का नहीं है। इसी वजह से पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
पशुओं के अंतिम संस्कार की अलग व्यवस्था नहीं
नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने बताया कि निगम की ओर से पशुओं के अंतिम संस्कार के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने पैसे लेने के आरोपों की जांच कराने की बात कही है।
कमिश्नर के मुताबिक, किसी पालतू पशु, जैसे कुत्ते या गाय की मौत की सूचना मिलने पर स्वच्छता विभाग के कर्मचारी मृत पशु को डंपिंग यार्ड ले जाते हैं। वहां उसे दफनाने की प्रक्रिया की जाती है।
पशुओं के अंतिम संस्कार की अलग व्यवस्था नहीं
नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने बताया कि निगम की ओर से पशुओं के अंतिम संस्कार के लिए अलग से कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने पैसे लेने के आरोपों की जांच कराने की बात कही है।
कमिश्नर के मुताबिक, किसी पालतू पशु, जैसे कुत्ते या गाय की मौत की सूचना मिलने पर स्वच्छता विभाग के कर्मचारी मृत पशु को डंपिंग यार्ड ले जाते हैं। वहां उसे दफनाने की प्रक्रिया की जाती है।
