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| ड्रग्स केस में आरोपियों के मोबाइल, आईपैड और लैपटॉप जांच के लिए लैब भेजे गए। |
इन इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में मुख्य आरोपी बताई गईं नव्या मलिक और विधि अग्रवाल के मोबाइल भी शामिल हैं। पुलिस ने पहले इन गैजेट को जब्त कर थाने में रखा था। अब इन्हें लैब भेजे जाने के बाद डिवाइस में मौजूद डिजिटल जानकारी की जांच की जाएगी।
पुलिस के अनुसार, मामले की प्रारंभिक जांच में आरोपियों के संपर्क में रहने वाले कई लोगों की जानकारी सामने आई थी। नव्या और विधि की कुछ बड़े कारोबारियों, नेताओं और उनके बच्चों के साथ चैट होने की जानकारी भी सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इन सभी पहलुओं का चार्जशीट में उल्लेख नहीं किया गया है।
नव्या मलिक को 23 अगस्त 2025 को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस की जांच में नव्या और विधि अग्रवाल को इस मामले में मुख्य आरोपी बताया गया है। नव्या को इंटीरियर डिजाइनर और विधि को इवेंट ऑर्गेनाइजर बताया गया है।
मामले में नवंबर में चार्जशीट पेश की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रारंभिक जांच के दौरान आरोपियों से पूछताछ और अन्य जानकारी के आधार पर 325 से ज्यादा लोगों के नाम सामने आए थे। इनमें ऐसे लोग भी बताए गए हैं, जो आरोपियों के साथ पार्टियों में शामिल होते थे या ड्रग्स खरीदते थे।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस सूची में कुछ विधायकों के रिश्तेदार और अधिकारियों के बच्चे भी शामिल थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन लोगों को पूछताछ के लिए नहीं बुलाया गया और न ही उनकी काउंसिलिंग की गई। इस मामले में शासन को पत्र लिखे जाने की बात भी सामने आई है।
पुलिस की कार्रवाई को लेकर तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। वहीं, मामले की जांच में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इनसे आरोपियों के संपर्क और डिजिटल बातचीत से जुड़ी जानकारी सामने आ सकती है।
रिटायर स्पेशल डीजी अन्वेष मंगलम के मुताबिक, ड्रग्स तस्करी जैसे मामलों में मोबाइल फोन और लैपटॉप महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। उनके अनुसार, डिजिटल चैट और संपर्कों से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में थे और ड्रग्स की खरीद-बिक्री से जुड़े लोगों की पहचान कैसे की जा सकती है।
अब पुलिस ने सभी संबंधित इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जांच के लिए लैब भेजे हैं। डीसीपी सेंट्रल जोन तारकेश्वर पटेल ने बताया कि कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जांच के लिए भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी इनकी जांच हुई है, लेकिन अब इन्हें लैब भेजा गया है और रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस मामले में लैब रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस की आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी।
रिटायर स्पेशल डीजी अन्वेष मंगलम के मुताबिक, ड्रग्स तस्करी जैसे मामलों में मोबाइल फोन और लैपटॉप महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। उनके अनुसार, डिजिटल चैट और संपर्कों से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में थे और ड्रग्स की खरीद-बिक्री से जुड़े लोगों की पहचान कैसे की जा सकती है।
अब पुलिस ने सभी संबंधित इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जांच के लिए लैब भेजे हैं। डीसीपी सेंट्रल जोन तारकेश्वर पटेल ने बताया कि कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जांच के लिए भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले भी इनकी जांच हुई है, लेकिन अब इन्हें लैब भेजा गया है और रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस मामले में लैब रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस की आगे की कार्रवाई स्पष्ट होगी।
