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| महिला चालक के ई-रिक्शा में सफर करते विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह। |
यह सिर्फ एक स्थान से दूसरे स्थान तक की यात्रा नहीं थी, बल्कि महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का संदेश भी देती दिखाई दी। महिला हितग्राही के ई-रिक्शा में सफर कर विधानसभा अध्यक्ष ने उनका उत्साह बढ़ाया और श्रमिक महिलाओं को यह संदेश दिया कि महिलाएं अब आर्थिक रूप से मजबूत बनने के साथ अपने दम पर आगे बढ़ रही हैं।
पद्मश्री गोविंदराम निर्मलकर ऑडिटोरियम में आयोजित श्रमिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आज महिलाएं साइकिल, मोटरसाइकिल और कार चलाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पायलट बनकर हवाई जहाज भी उड़ा रही हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ महिलाएं सक्षम, सशक्त और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ा रही हैं।
विधानसभा अध्यक्ष के इस प्रोत्साहन से ई-रिक्शा चालक सरिता वर्मा के चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास साफ दिखाई दिया। उनके लिए यह अवसर सम्मान और प्रेरणा से भरा रहा।
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श्रमिक सम्मेलन के दौरान शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने वाली महिलाओं ने अपने अनुभव भी साझा किए। महिलाओं ने बताया कि ई-रिक्शा मिलने से उन्हें रोजगार और नियमित आय का साधन मिला है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।
इस मौके पर डॉ. रमन सिंह ने एक अन्य ई-रिक्शा चालक उषा साहू से भी बातचीत की। उन्होंने उनकी पढ़ाई के बारे में जानकारी ली और 10वीं कक्षा के बाद भी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
श्रमिक सम्मेलन के दौरान शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने वाली महिलाओं ने अपने अनुभव भी साझा किए। महिलाओं ने बताया कि ई-रिक्शा मिलने से उन्हें रोजगार और नियमित आय का साधन मिला है, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।
इस मौके पर डॉ. रमन सिंह ने एक अन्य ई-रिक्शा चालक उषा साहू से भी बातचीत की। उन्होंने उनकी पढ़ाई के बारे में जानकारी ली और 10वीं कक्षा के बाद भी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
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उषा साहू के पति भावेश साहू ने बताया कि उन्होंने ही अपनी पत्नी को ई-रिक्शा चलाना सिखाया है। उन्होंने कहा कि वे हमेशा अपनी पत्नी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। ई-रिक्शा चलाने से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और अब बचत करने की क्षमता भी बढ़ी है।
श्रमिक सम्मेलन में सामने आए इन अनुभवों से यह बात स्पष्ट हुई कि जब महिलाओं को अवसर, प्रशिक्षण और परिवार का सहयोग मिलता है तो वे रोजगार के नए रास्ते अपनाकर न केवल आत्मनिर्भर बनती हैं, बल्कि परिवार की आर्थिक मजबूती में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
उषा साहू के पति भावेश साहू ने बताया कि उन्होंने ही अपनी पत्नी को ई-रिक्शा चलाना सिखाया है। उन्होंने कहा कि वे हमेशा अपनी पत्नी को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। ई-रिक्शा चलाने से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और अब बचत करने की क्षमता भी बढ़ी है।
श्रमिक सम्मेलन में सामने आए इन अनुभवों से यह बात स्पष्ट हुई कि जब महिलाओं को अवसर, प्रशिक्षण और परिवार का सहयोग मिलता है तो वे रोजगार के नए रास्ते अपनाकर न केवल आत्मनिर्भर बनती हैं, बल्कि परिवार की आर्थिक मजबूती में भी महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
